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108 names of lord Durga

Published: 31/10/2024 Updated: 31/12/2024 1 min read

108 names of lord Durga

क्रमांकनाममंत्रविशेषता
1श्रीॐ श्रियै नमः।जो श्री स्वरूपा हैं।
2उमाॐ उमायै नमः।देवी उमा के रूप में अवतार लेने वाली
3भारतीॐ भारत्यै नमः।जो वाणी स्वरूपा हैं।
4भद्राॐ भद्रायै नमः।महान एवं दयालु
5शर्वाणीॐ शर्वाण्यै नमः।जो भगवान शिव की पत्नी हैं।
6विजयाॐ विजयायै नमः।जो विजय प्राप्त करने वाली हैं।
7जयाॐ जयायै नमः।जो सफलता प्राप्त करने वाली हैं।
8वाणीॐ वाण्यै नमः।जो वाणी स्वरूपा हैं।
9सर्वगतायॐ सर्वगतायै नमः।जो सर्वत्र व्याप्त हैं।
10गौरीॐ गौर्यै नमः।जो गौर वर्ण वाली हैं।
11वाराहीॐ वाराह्यै नमः।जो वराह भगवान की शक्ति हैं।
12कमलप्रियाॐ कमलप्रियायै नमः।जिन्हें कमल पुष्प प्रिय है।
13सरस्वतीॐ सरस्वत्यै नमः।जो विद्या की देवी हैं।
14कमलाॐ कमलायै नमः।जो देवी लक्ष्मी के स्वरूप में स्थित हैं।
15मायाॐ मायायै नमः।जो सृष्टि में माया के रूप में विद्यमान हैं।
16मातंगीॐ मातंग्यै नमः।भगवान मातंग की देवी
17अपराॐ अपरायै नमः।जो अपरा प्रकृति के रूप में विद्यमान हैं।
18अजाॐ अजायै नमः।जो अजन्मी हैं / जो माया स्वरूपा हैं।
19शांकभर्याॐ शांकभर्यै नमः।जो भगवान शंकर की धर्मपत्नी हैं।
20शिवाॐ शिवायै नमः।जो शिव जी की अर्धाङ्गिनी हैं।
21चण्डीॐ चण्डयै नमः।जो उग्र रूप में विराजमान हैं।
22कुण्डलिनीॐ कुण्डल्यै नमः।जो कुण्डलिनी के रूप में स्थित हैं।
23वैष्णवीॐ वैष्णव्यै नमः।जो अजेय हैं।
24क्रियाॐ क्रियायै नमः।जो प्रत्येक क्रिया में विद्यमान हैं।
25श्रीॐ श्रियै नमः।जो शुभता एवं धन-सम्पत्ति की देवी हैं।
26इन्दिराॐ ऐन्द्रयै नमः।जो सुन्दर एवं वैभाशाली हैं।
27मधुमतीॐ मधुमत्यै नमः।जो शहद के समान मधुर प्रकृति वाली हैं।
28गिरिजाॐ गिरिजायै नमः।जो हिमालय की पुत्री हैं।
29सुभगाॐ सुभगायै नमः।जो सुख-सौभाग्य की देवी हैं।
30अम्बिकाॐ अम्बिकायै नमः।जो सम्पूर्ण जगत की माता हैं।
31ताराॐ तारायै नमः।जो संसार सागर से तारने वाली हैं।
32पद्मावतीॐ पद्मावत्यै नमः।जो कमल धारण करने वाली हैं।
33हंसाॐ हंसायै नमः।जो परमात्मा हैं।
34पद्मनाभसहोदरीॐ पद्मनाभसहोदर्यै नमः।जो श्री पद्मनाभ (विष्णु जी) की बहन हैं।
35अपर्णाॐ अपर्णायै नमः।जो व्रत के समय में पत्ते तक ग्रहण नहीं करती हैं।
36ललिताॐ ललितायै नमः।जो सुखद, आकर्षक एवं सुन्दर हैं।
37धात्रीॐ धात्र्यै नमः।जो सम्पूर्ण सृष्टि का पालन करने वाली माता हैं।
38कुमारीॐ कुमार्यै नमः।जो कुमारी कन्या के रूप में विराजमान हैं।
39शिखवाहिन्यैॐ शिखवाहिन्यै नमः।जो पर्वतों पर निवास करती हैं।
40शाम्भवीॐ शाम्भव्यै नमः।जो भगवान शम्भू की अर्धाङ्गिनी हैं।
41सुमुखीॐ सुमुख्यै नमः।जो अत्यन्त सुन्दर रूप वाली हैं।
42मैत्र्यैॐ मैत्र्यै नमः।जो स्वयं मित्रता स्वरूपा हैं।
43त्रिनेत्राॐ त्रिनेत्रायै नमः।जो तीन नेत्रों वाली हैं।
44विश्वरूपाॐ विश्वरूपिण्यै नमः।जो स्वयं सृष्टि के रूप में विद्यमान हैं।
45आर्याॐ आर्यायै नमः।जो पूजनीय हैं।
46मृडानीॐ मृडान्यै नमः।जो भगवान मृड (शिव) की पत्नी हैं।
47हींकार्यैॐ हींकार्यै नमः।जो सिंह के समान गर्जना करने वाली हैं।
48क्रोधिन्यैॐ क्रोधिन्यै नमः।जो अत्यधिक क्रोध में हैं।
49सुदिनायैॐ सुदिनायै नमः।जो तेजपूर्ण एवं उज्ज्वल हैं।
50अचलॐ अचलायै नमः।जो अडिग-अटल हैं।
51सूक्ष्मॐ सूक्ष्मायै नमः।जो सूक्ष्म रूप में कण-कण में व्याप्त हैं।
52परात्परायैॐ परात्परायै नमः।जो सर्वोच्च से भी सर्वोच्च हैं।
53शोभाॐ शोभायै नमः।जो वैभवशाली एवं प्रतिभाशाली हैं।
54सर्ववर्णाॐ सर्ववर्णायै नमः।जो सभी वर्ण के रूपों में स्थित हैं।
55हरप्रियाॐ हरप्रियायै नमः।जो भगवान शिव को प्रिय हैं।
56महालक्ष्मीॐ महालक्ष्म्यै नमः।जो महालक्ष्मी स्वरूपा हैं।
57महासिद्धिॐ महासिद्धयै नमः।जो स्वयं श्रेष्ठ सिद्धियों के रूप में स्थित हैं।
58स्वधाॐ स्वधायै नमः।जो स्वधा स्वरूपा हैं।
59स्वाहाॐ स्वाहायै नमः।जो स्वाहा स्वरूपा हैं।
60मनोन्मनीॐ मनोन्मन्यै नमः।जो भगवान शिव की शक्ति हैं।
61त्रिलोकपालिनीॐ त्रिलोकपालिन्यै नमः।जो तीनों लोकों का पालन करती हैं।
62उद्भूताॐ उद्भूतायै नमः।जो प्रत्यक्ष एवं दृष्टिगोचर हैं।
63त्रिसन्ध्याॐ त्रिसन्ध्यायै नमः।जो समय के तीनों कालों में स्थित हैं।
64त्रिपुरान्तक्यैॐ त्रिपुरान्तक्यै नमः।जो त्रिपुरासुर का अन्त करने वाले भगवान शिव की अर्धांगिनी हैं।
65त्रिशक्त्यैॐ त्रिशक्त्यै नमः।जो इच्छा, ज्ञान एवं क्रिया रूपी तीन शक्तियों में स्थित हैं।
66त्रिपदायैॐ त्रिपदायै नमः।जो गायत्री के त्रिपदा छन्द में स्थित हैं।
67दुर्गाॐ दुर्गायै नमः।जो दैत्यनाशक, विघ्ननाशक, रोगनाशक, पापनाशक तथा शत्रुनाशक हैं।
68ब्राह्मीॐ ब्राह्मयै नमः।जो भगवान ब्रह्मा की शक्ति हैं।
69त्रैलोक्यवासिनीॐ त्रैलोक्यवासिन्यै नमः।जो तीनों लोकों में निवास करती हैं।
70पुष्कराॐ पुष्करायै नमः।जो पूर्ण हैं।
71अत्रिसुताॐ अत्रिसुतायै नमः।जो महर्षि अत्रि की पुत्री हैं।
72गूढ़ाॐ गूढ़ायै नमः।जो अति गुप्त एवं रहस्यमयी हैं।
73त्रिवर्णाॐ त्रिवर्णायै नमः।जो तीन वर्ण वाली हैं।
74त्रिस्वराॐ त्रिस्वरायै नमः।जो तीन स्वरों (उदात्त, अनुदात्त एवं स्वरित) के रूप में स्थित हैं।
75त्रिगुणाॐ त्रिगुणायै नमः।जो सत्व, रज एवं तम के तीन गुणों से युक्त हैं।
76निर्गुणाॐ निर्गुणायै नमः।जो सत्व, रज एवं तम के तीन गुणों से मुक्त हैं।
77सत्याॐ सत्यायै नमः।जो स्वयं परम सत्य हैं।
78निर्विकल्पाॐ निर्विकल्पायै नमः।जो सभी प्रकार के परिवर्तन एवं मतभेद से मुक्त हैं।
79निरन्जनाॐ निरंजिन्यै नमः।जो समस्त प्रकार के बन्धनों से मुक्त हैं।
80ज्वालिन्यैॐ ज्वालिन्यै नमः।जो ज्वाला के रूप में विद्यमान हैं।
81मालिनीॐ मालिन्यै नमः।जो विभिन्न प्रकार की मालायें धारण किये हुये हैं।
82चर्चायैॐ चर्चायै नमः।जिनका वेदों में पुनः-पुनः वर्णन प्राप्त होता है।
83क्रव्यादोप निबर्हिण्यैॐ क्रव्यादोप निबर्हिण्यै नमः।जो राक्षसों का संहार करती हैं।
84कामाक्षीॐ कामाक्ष्यै नमः।देवी दुर्गा का एक रूप जो कांची में पूजा जाता है।
85कामिन्यैॐ कामिन्यै नमः।जो संसार का मन मोहने वाली हैं।
86कान्ताॐ कान्तायै नमः।जो अत्यन्त सुन्दर हैं।
87कामदायैॐ कामदायै नमः।जो मनोकामनाओं की पूर्ति करती हैं।
88कलहंसिनीॐ कलहंसिन्यै नमः।जो सर्वशक्तिशाली परमात्मा स्वरूपा हैं।
89सलज्जाॐ सलज्जायै नमः।जो लज्जाशील हैं।
90कुलजाॐ कुलजायै नमः।जो उत्तम कुल से हैं।
91प्राज्ञाॐ प्राज्ञ्यै नमः।जो ज्ञानी एवं बुद्धिशाली हैं।
92प्रभाॐ प्रभायै नमः।जो अत्यन्त तेजोमयी हैं।
93मदनसुन्दरीॐ मदनसुन्दर्यै नमः।जो कामदेव के समान सुन्दर हैं।
94वागीश्वरीॐ वागीश्वर्यै नमः।जो वाणी की देवी हैं।
95विशालाक्षीॐ विशालाक्ष्यै नमः।जिनके विशाल नेत्र हैं।
96सुमङ्गलीॐ सुमंगल्यै नमः।जो अत्यन्त शुभ हैं।
97कालीॐ काल्यै नमः।जो श्याम वर्ण वाली हैं।
98महेश्वरीॐ महेश्वर्यै नमः।जो महेश्वर (शिव जी) की धर्मपत्नी हैं।
99चण्डीॐ चण्ड्यै नमः।देवी दुर्गा का उग्र स्वरूप
100भैरवीॐ भैरव्यै नमः।जो भैरव (भगवान शिव) की पत्नी हैं।
101भुवनेश्वरीॐ भुवनेश्वर्यै नमः।जो 14 भुवनों की अधिष्ठात्री देवी हैं।
102नित्याॐ नित्यायै नमः।जो शाश्वत हैं।
103सानन्दविभवायैॐ सानन्दविभवायै नमः।जो सम्पूर्ण सृष्टि में आनन्द-मङ्गल करती हैं।
104सत्यज्ञानाॐ सत्यज्ञानायै नमः।जो सत्य को जानने वाली हैं।
105तमोपहाॐ तमोपहायै नमः।जो अज्ञान रूपी अहंकार को नष्ट करती हैं।
106महेश्वरप्रियंकाॐ महेश्वरप्रियंकर्यै नमः।जो भगवान शिव को आनन्द प्रदान करती हैं।
107महात्रिपुरसुन्दरीॐ महात्रिपुरसुंदर्यै नमः।जो तीनों लोकों में सर्वाधिक सुन्दर देवी त्रिपुरसुन्दरी के रूप में स्थित हैं।
108दुर्गापरमेश्वर्यैॐ दुर्गापरमेश्वर्यै नमः।जो समस्त कष्टों को नष्ट करने वाली सर्वोच्च देवी हैं।
 

108 names of lord Durga

यहाँ ऊपर दिए गए नामों (108 names of lord Durga) के बारे में संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत है:
  1. श्री: शुभता और धन-सम्पत्ति की देवी।
  2. उमा: देवी उमा, जो भगवान शिव की पत्नी हैं।
  3. भारती: वाणी की देवी, ज्ञान और कला की प्रतीक।
  4. भद्रा: महान और दयालु देवी।
  5. शर्वाणी: भगवान शिव की पत्नी।
  6. विजया: विजय की देवी, जो सफलताओं का प्रतीक हैं।
  7. जया: सफलता और विजय की देवी।
  8. वाणी: वाणी की देवी, जो संचार और ज्ञान की प्रतीक हैं।
  9. सर्वगताय: जो सर्वत्र व्याप्त हैं।
  10. गौरी: भगवान शिव की अर्धांगिनी, जो गौर वर्ण वाली हैं।
  11. वाराही: वराह भगवान की शक्ति।
  12. कमलप्रिया: जिन्हें कमल पुष्प प्रिय है।
  13. सरस्वती: विद्या, संगीत और कला की देवी।
  14. कमला: देवी लक्ष्मी का स्वरूप।
  15. माया: सृष्टि में माया के रूप में विद्यमान।
  16. मातंगी: भगवान मातंग की देवी।
  17. अपरा: अपरा प्रकृति के रूप में विद्यमान।
  18. अजा: अजन्मी देवी।
  19. शांकभर्या: भगवान शंकर की पत्नी।
  20. शिवा: भगवान शिव की अर्धाङ्गिनी।
  21. चण्डी: उग्र एवं शक्ति स्वरूपा देवी।
  22. कुण्डलिनी: आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक।
  23. वैष्णवी: भगवान विष्णु की शक्ति।
  24. क्रिया: क्रिया और कार्य की देवी।
  25. इन्दिरा: वैभव और सौंदर्य की देवी।
  26. मधुमती: शहद जैसी मधुरता का प्रतीक।
  27. गिरिजा: हिमालय की पुत्री।
  28. सुभगा: सुख और सौभाग्य की देवी।
  29. अम्बिका: सम्पूर्ण जगत की माता।
  30. तारा: संसार सागर से तारने वाली देवी।
  31. पद्मावती: कमल धारण करने वाली देवी।
  32. हंसा: परमात्मा का प्रतीक।
  33. पद्मनाभसहोदरी: भगवान विष्णु की बहन।
  34. अपर्णा: व्रत के समय में पत्ते तक ग्रहण न करने वाली।
  35. ललिता: सुखद और आकर्षक देवी।
  36. धात्री: पालन करने वाली माता।
  37. कुमारी: कुमारी कन्या के रूप में।
  38. शिखवाहिन्यै: पर्वतों पर निवास करती देवी।
  39. शाम्भवी: भगवान शम्भू की अर्धांगिनी।
  40. सुमुखी: अत्यन्त सुन्दर रूप वाली देवी।
  41. मैत्र्यै: मित्रता का प्रतीक।
  42. त्रिनेत्रा: तीन नेत्रों वाली देवी।
  43. विश्वरूपा: सृष्टि के रूप में विद्यमान।
  44. आर्या: पूजनीय देवी।
  45. मृडानी: भगवान मृड की पत्नी।
  46. हींकार्यै: सिंह के समान गर्जना करने वाली।
  47. क्रोधिन्यै: अत्यधिक क्रोध वाली देवी।
  48. सुदिनायै: तेजपूर्ण और उज्ज्वल।
  49. अचल: अडिग और अटल।
  50. सूक्ष्म: सूक्ष्म रूप में व्याप्त।
  51. परात्परायै: सर्वोच्च से भी सर्वोच्च।
  52. शोभा: वैभवशाली देवी।
  53. सर्ववर्णा: सभी वर्णों की देवी।
  54. हरप्रिया: भगवान शिव को प्रिय।
  55. महालक्ष्मी: धन, ऐश्वर्य और समृद्धि की देवी।
  56. महासिद्धि: श्रेष्ठ सिद्धियों का प्रतीक।
  57. स्वधा: स्वधा स्वरूपा।
  58. स्वाहा: स्वाहा स्वरूपा।
  59. मनोन्मनी: भगवान शिव की शक्ति।
  60. त्रिलोकपालिनी: तीनों लोकों का पालन करने वाली देवी।
  61. उद्भूता: दृष्टिगोचर देवी।
  62. त्रिसन्ध्या: तीनों कालों में स्थित देवी।
  63. त्रिपुरान्तक्यै: त्रिपुरासुर का अन्त करने वाली देवी।
  64. त्रिशक्त्यै: इच्छा, ज्ञान और क्रिया की शक्तियों का प्रतीक।
  65. त्रिपदायै: गायत्री के त्रिपदा छन्द में स्थित।
  66. दुर्गा: दैत्यनाशक देवी।
  67. ब्राह्मी: भगवान ब्रह्मा की शक्ति।
  68. त्रैलोक्यवासिनी: तीनों लोकों में निवास करती देवी।
  69. पुष्करा: पूर्णता का प्रतीक।
  70. अत्रिसुता: महर्षि अत्रि की पुत्री।
  71. गूढ़ा: गुप्त एवं रहस्यमयी।
  72. त्रिवर्णा: तीन वर्णों वाली।
  73. त्रिस्वरा: तीन स्वरों का प्रतीक।
  74. त्रिगुणा: सत्व, रज और तम के गुणों से युक्त।
  75. निर्गुणा: तीन गुणों से मुक्त।
  76. सत्या: परम सत्य।
  77. निर्विकल्पा: सभी प्रकार के परिवर्तन से मुक्त।
  78. निरञ्जना: बन्धनों से मुक्त।
  79. ज्वालिन्यै: ज्वाला के रूप में।
  80. मालिनी: विभिन्न प्रकार की मालाएँ धारण करने वाली।
  81. चर्चायै: वेदों में वर्णित देवी।
  82. क्रव्यादोप निबर्हिण्यै: राक्षसों का संहार करती देवी।
  83. कामाक्षी: कांची में पूजा जाने वाली देवी।
  84. कामिन्यै: संसार को मोहित करने वाली।
  85. कान्ता: अत्यन्त सुन्दर।
  86. कामदायै: मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाली।
  87. कलहंसिनी: सर्वशक्तिशाली परमात्मा स्वरूपा।
  88. सलज्जा: लज्जाशील देवी।
  89. कुलजा: उत्तम कुल की देवी।
  90. प्राज्ञा: ज्ञानी और बुद्धिशाली।
  91. प्रभा: तेजोमयी देवी।
  92. मदनसुन्दरी: कामदेव के समान सुन्दर।
  93. वागीश्वरी: वाणी की देवी।
  94. विशालाक्षी: विशाल नेत्रों वाली।
  95. सुमङ्गली: अत्यन्त शुभ देवी।
  96. काली: श्याम वर्ण वाली।
  97. महेश्वरी: भगवान शिव की पत्नी।
  98. भैरवी: देवी दुर्गा का उग्र स्वरूप।
  99. भुवनेश्वरी: 14 भुवनों की अधिष्ठात्री देवी।
  100. नित्या: शाश्वत देवी।
  101. सानन्दविभवायै: सम्पूर्ण सृष्टि में आनन्द लाने वाली।
  102. सत्यज्ञाना: सत्य को जानने वाली।
  103. तमोपहा: अज्ञान का नाश करने वाली।
  104. महेश्वरप्रियंका: भगवान शिव को आनन्द देने वाली।
  105. महात्रिपुरसुन्दरी: त्रिपुरसुन्दरी के रूप में अत्यन्त सुन्दर।
  106. दुर्गापरमेश्वर्यै: समस्त कष्टों को नष्ट करने वाली देवी।
ये सभी नाम देवी शक्ति के विभिन्न स्वरूपों और विशेषताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।

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