कलयुग वर्सेस कृष्णा रैप लिरिक्स
Har अशुद्धि के लिए मैं शुद्ध होना चाहता हूँ,Aur kaali buddhi ka मैं बुद्ध होना चाहता हूँचाहता हूँ shristi में yuddh चारों ओर होइस dharti के प्रेम se मैं क्रुद्ध होना चाहता हूँचाहता हूँ तोड़ देना सत्य की deenar koचाहता हूँ मोड़ देना prem ki guhar koचाहता हूँ इस धरा पर paap फूले और फलेचाहता हूँ इस जगत के हर हृदय में छल पलेमैं नहीं vo रावण jo aake मुझको मार dogeमैं नहीं वह कंस जिसकी बाँह तुम उखाड़ dogePaap ka mai devta hu mujhko पहचान लोKhelta hu mind se ye raaz तुम bhi जान लोतुम्हारे भक्त भी मेरी पकड़ में आ गए हैंमारना है मुझको तो, पहले इन्हें मार दोयुद्ध करना चाहो तो insaniyat ki haar hodharm ki ho haani, ab adharm ki pukaar hoSab तुम्हारे भक्त jan bhi ab विरोधी हो गए हैंRab तुम्हारे संतजन bhi kab se क्रोधी हो गए हैमैं नहीं hun बस me kisi राम, कृष्ण और बुद्ध keAb karunga नाश h manushya ke vajood keअब नहीं मैं ग़लतियाँ वैसी करूँ जो कर चुकाAur रावण bhi वीर था jo कब का छल से मर चुकामार diya कंस को bhi कुश्ती ke khel meYe kalyug hai suno na hone vala fail maiकंस- रावण- दुर्योधन तुमको नहीं पहचानते थेKaisa ladna ज़िद पकड़ना yuddh me vo jaan deteFact ko ni jaante theमैं ni abse छोटी बात पर अड़ जाऊँ joDimaag se chalaak ख़ोटी बात se बढ़ जाऊँ toNaa hi जीतता दुनिया me अब किसी भी देश कोGhaseet ta mai neechta manushyata ke bhesh koमैंने सुना था tumhara इन्हीं की देह में tha वासधर्म, कर्म, पाठ-पूजा poore desh ka vinashइन्हीं की aastha bani thi raastaAur aaj na daraar lu ye banenge mera naastaAaj insaniyat pe paap ka jo vaas haiSamaaj ka har ek electron mera das haiकाटना चाहो mujhko पहले इनको काट दो,Aaj bhrast kar chuka vikas ke vigyaan koबचो अपने ही भक्तों से, ab सम्हालो जान कोho सके तो तुम बचा लो aaj अपने मान कोअब नहीं मैं- रूप धरके, सज-सँवर के घूमता हूँअब नहीं मैं छल कपट को सर पे रख के घूमता हूँअब नहीं हैं निंदनीय चोरी aur hatyaहुए अभिनंदनीय झूठ vale tathyamai hi hu kalyug…kaal ka mai baap huubar na paaye koi bhi vinash ka mai shraap huHan maana tu hai chal-kapatIs jaha me har-wakhatKar raha Tu nash sabkaRo raha mai sir pakadक्यूँ है क्रोध मन में तेरे इतना सच के वास्तेचाहता क्यों बंद करना धर्म वाले रास्तेमुझ को चुनौती देके तू जो भगवान होना चाहता हैपुतला अज्ञान का है तू पर ज्ञान होना चाहता हैतू समय का मात्र प्रतिवाद और विवाद हैतो खामखा क्यों ब्रह्म वाला नाद होना चाहता हैतू ही तो हलाहल है इस समय की चाल कातू स्वयं ही विश्व का गोपाल होना चाहता हैतू स्वयं को कंश और रावण से better मानता हैतू स्वयं को विकट शक्ति शाली योद्धा जानता हैतू नहीं है कुछ भी कलि सत्य को तू जान लेकुछ भी तेरे वश में नहीं, बात मेरी मान लेजो बीत गया तू ऐसा कल या आने वाले कल छलमै वर्तमान का महाराग, मै सदा उपस्थित पुलकित पलतू बीते कल की ग्लानि है या आने वाली चिंता हैमै वर्तमान आनंदित छन , ये विश्व मुझी में खिलता हैतू कल की बाते करता है, मैं कल्कि बन के आता हूँऔर तेरे कल की बातो को ,मैं कल्कि आज मिटाता हूँतू कलि कपट का ताला है, मैं कल्कि उस की चाभी हूँतू शंका की है महाधुंध, मैं समाधान की लाली हूँकल का मतलब जो बीत गया, कल का मतलब जो आएगाकल का मतलब है जो मशीन, कल जो वो दुख पहुचायेगाकल का मतलब जो ग्लानि है ,कल का मतलब जो चिंता हैकल का मतलब जो पास नहीं , कल कभी किसी को मिलता हैकल तो बस एक खुमारी है, कल बीत रही बीमारी हैकल मानवता की आशा भी, कल तो उसकी बेकारी हैकल वो जिस का अस्तित्व नहीं, कल वो जिस का व्यक्तित्व नहींतु बस है कलयुग एक कल्पना, जीवन तू का सत्य नहींसुन कलि अभी तू कच्चा है, तू वीर नहीं बस बच्चा हैचल तुझ को आज बताता हूँ मैं विश्व रूप दिखलाता हूँमैं सत्य नारायण आदी पुरुष, सच से तुझको मिलवाता हूँमै अखिल विश्व की श्रद्धा हूँ , मै सबके दिल की की भक्ति हूँभटके अर्जुन की कुरुक्षेत्र में, जीतने वाली शक्ति हूँजब सत्य जागता है मुझ मै, मै सतयुग नाम धराता हूँजब राम प्रकट हो जाते है , मै त्रेता युग कहलाता हूँजब न्याय – धर्म की इच्छा हो, द्वापर युग हो जाता हूँजब काम, क्रोध, मद , लोभ उठे , तब कलि काल कहलाता हूँऔर मस्त मगन जब होता हूँ, तब शिव शंभु कहलाता हूँफिर नृत्य करूँ मै तांडव सा तब मै महाकाल हो जाता हूँमै महादेव का डमरू, हैं जिनके सर पर चाँदमै परशुराम का फरसा मैं ही श्री राम का बाणतू रावण का कोलाहल है, और कंश का हाहाकारमें सृष्टि का हूँ विजय नाद, और धर्म की जय जयकारमें भी अनंग, तू भी अनंगतू संग संग , में अंग अंगतू है अरूप, में दिव्य रूपतु कल है, कपट का है कुरूपतु खण्ड-खण्ड, मैं हूँ अखण्डमैं शान्तिरूप हूँ मैं प्रचण्डमैं ही सकार, मैं ही नकारमैं धुआंधार, मैं ही मकारमैं ही पुकार, चीत्कार,मैं नमस्कार, मैं चमत्कारऔर मैं ही हूँ तूफान, मैं ध्यानमैं ज्ञान, मैं सर्व शक्तिमानबैरियों का बैर, प्रेमियों की प्रीतनिर्बलों का मान, पुण्य की मैं जीतमैं ही खटपट, मैं ही झटपट, मैं ही मंदिर मस्जिद का पटमैं ही इस घट, मैं ही उस घट, मैं ही पनिहारिन और पनघटमैं ही अटकन, मैं ही भटकन, मैं ही इस जीवन की चटकनमैं अर्थवान, मैं धर्मवान, मैं मोक्षवान, मैं कर्मवानमैं ज्ञानवान, विज्ञानवान, मैं दयावान, मैं समाधानकर्म भी मै हूँ, मर्म भी मै हूँ, जीवन का सब धर्म भी मैं हूँजीवन के इस पार भी मैं हूँ, जीवन के उस पार भी मैं हूँजीवन का उद्देश्य भी मैं हूँ, जीवन का उपकार भी मैं हूँआह भी मैं हूँ, वाह भी मैं हूँ, इस जीवन की चाह भी मैं हूँतन भी मैं हूँ, मन भी मैं हूँ, इस जीवन का धन भी मैं हूँआन भी मैं हूँ, मान भी मैं हूँ, इस जीवन की शान भी मैं हूँज्ञान भी मैं हूँ, दान भी मैं हूँ, जीवन का अभिमान भी मैं हूँजीत भी मैं हूँ, हार भी मैं हूँ, इस जीवन का सार भी मैं हूँसन्त भी मैं हूँ, अंत भी मैं हूँ, आदि और अनंत भी मैं हूँभूख प्यास और आस भी मैं हूँ, जीवन का विश्वास भी मैं हूँKaise पार beta मुझसे पायेगा, Kaise mere saamne टिक पायेगासत्य aur धर्म vale पैरों tale, भूमि पर hi buri tarah कुचला जायेगा